Home स्टोरी कविता प्रखर वक्ता, कवि और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन परिचय

प्रखर वक्ता, कवि और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन परिचय

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श्री अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष, प्रखर वक्ता, प्रभावशाली कवि और पूर्व प्रधानमंत्री थे। राजनीति में सक्रिय रहते हुए अपनी कविताओं में विशिष्ट पहचान बनाई, उनके कविताओं में त्याग, बलिदान, देशानुराग, स्वाभिमान, अन्याय के प्रति विद्रोह, आस्था एवं समर्पण का भाव रहता है। इस भारत के सपूत के कार्यों से देश का मस्तक ऊँचा हुआ, (atal bihari vajpayee biography in hindi) अटल जी की जीवन-परिचय हिन्दी में पढ़ें।

अटल जी के पिता पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता का नाम कृष्णा देवी था,ग्वालियर में शिंदे की छावनी मध्य प्रदेश, में 25 दिसम्बर 1924 को अटल जी का जन्म हुआ। विद्यालय प्रमाणपत्र उनका जन्मवर्ष दो साल बाद 1926 के 25 दिसम्बर को बताता है। 25 दिसम्बर ईसामसीह का जन्मदिन भी है इसलिए अटलजी के जन्म की खुशियाँ गिरजा घरों के उल्लास से स्वतः जुड़ गई।

अटल के परिवार संघ के प्रति विशेष निष्ठा रखने वाला था, जिसका ही परिणाम था की अटल जी का संघ की ओर स्वतः ही झुकाव हो गया, जिससे व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खुद ही सेवक बन गए, अध्ययन के प्रति उनकी रुचि बहुत अधिक था। अटल जी ने पिता के कविताओं को सुन-सुन के वे भी छंद के चरणों के अंतिम अक्षरों का मेल करने लगे थे, वे यहाँ तक कवि सम्मेलनों में जानें लगे थे।और मृत्यु 16 अगस्त 2018, नई दिल्ली में हुआ था।

अटल बिहारी जी का शिक्षा (Educations)

बी.ए. तक की शिक्षा ग्वालियर में हुई। वहाँ विक्टोरिया कालेज (वर्तमान नाम लक्ष्मीबाई कॉलेज) के छात्रसंघ के मंत्री और उपाध्यक्ष भी रहे। उन्हें भाषण देने और भाषण से मन्त्रमुग्ध कर देने का अभ्यास यही से हुआ। वे वाद-विवाद प्रतियोगिता में सदैव भाग लेते थे। अटल जी ने ग्वालियर के बाद कानुपर के डी.ए.वी कालेज में प्रवेश लिया और वहाँ दो साल गुजारे। राजनीति शास्त्र में प्रथम श्रेणी में एम. ए. किया।

कानपुर डी.ए.वी. कालेज में अटल जी के किस्सें

यह किस्सा अटलजी व उनके पिता को एक साथ एक ही क्लास में अध्ययन करने का है। यह एक अजूबा किस्सा प्रचलित है। हुआ यह था कि, अटलजी और उनके पिता दोनों का एक साथ एक कक्षा में अध्ययन करना था। अटलजी और उनके पिताजी दोनों ने कानून की पढ़ाई के लिए एक साथ प्रवेश लिया। उनके पिता जी राजकीय सेवा से निवृत्त हो गए थे और अटल जी कानून की पढ़ाई करना चाहते थे। पिताजी ने भी कानून की पढ़ाई करना चाहते थे। एक दिन अटल जी अपने पिता जी  के साथ दोनों प्रिन्सिपल कालका प्रसाद भटनागर के रूम में पहुँचे, दोनो लोगों के एक ही सेक्शन में प्रवेश मिला। जिस दिन पिता जी क्लास न जाएँ तो पुत्र को जवाब देना पड़े कि तुम्हारे पिताजी क्यों नहीं आए है? और जिस दिन पुत्र क्लास न जाए या गैरहाजिर हो जाए तो पिताजी से पुछा जाए कि कहाँ है आपके  पुत्र है? इस तरह से पूरे क्लास में ठहाके लगते रहते थे। अन्त में सेक्शन को बदलवाकर ही पिता-पुत्र को शांति मिली।

अटल जी को प्राप्त अवार्ड

  • सन 1942 में पद्य विभूषण का
  • सन 1999 में लोकमान्य तिलक अवार्ड
  • सन 1994 में पंडित गोविंद वल्लभपन्त अवार्ड
  • सन 1994- बेस्ट सांसद  अवार्ड
  • सन 2014 में भारत रत्न से नवाजा गया

अटल जी का महत्वपूर्ण बातें

  • जब पांचजन्य का प्रकाशन शुरु हुआ तो अटल जी को उसका सम्पादक बनाया गया।
  • सन् 1950 में लखनऊ में हिन्दी साहित्य सम्मेलन का राष्ट्रिय अधिवेशन आयोजित हुआ, जिसमें अटल जी को उपस्वागताध्यक्ष बनाया गया था।
  • 1955 में जब श्रीमती विजयलक्ष्मी पण्डित ने लोकसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दिया तो लखनऊ की संसदीय सीट खाली हो गई। फिर दो साल बाद 1957 के आम चुनाव में गोंडा जिले के बलरामपुर क्षेत्र से पहली बार सांसद हुए थे। तब से राजनीति ने उन्हें नहीं छोड़ा और न ही छोड़ा राष्ट्र चिंतन ने।
  • अटल जी पर लखनऊ फिदा था, वो लखनऊ पर फिदा थे।
  • लखनऊ (1957 से 2014 तक में 14वीं बार) अपना प्रतिनिधि बनाकर संसद में भेजता रहा।
  • सन 1960 में दैनिक स्वदेश के सम्पादक बनें। लेकिन यह आर्थिक संकटो के कारण इसे बंद करना पड़ा।
  • दिल्ली में अटल जी ने वीर-अर्जुन के सम्पादन का जिम्मेदारी संभाली।
  • वर्ष 1975-77 में देश आपातकाल के समय बंदी रहे थे।
  • वर्ष 1977-1979 तक वे भारत के विदेश मंत्री थे।
  • वर्ष 1980-86 तक भाजपा के अध्यक्ष थे।
  • स्नेह व समर्पण के भाव से डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के निजी सचिव बनें।
  • सन 1992 में अटल जी को पद्मभूषण से पुरस्कृत किया गया, तो उनके सम्मान में एक स्वागत समारोह हुआ, इसमें वे पहचान कविता पढ़ी थी, जिसमें अपने पूरे जीवन को उतार दिया था।
  • अटल जी कॉलेज में छात्र संघ का पहले प्रधानमंत्री और फिर उपाध्यक्ष चुना गया था।
  • भारतीय जनता पार्टी के तरफ से बनने वाले प्रधानमंत्री थे,
  • 16 मई 1996 से 31 मई 1996 तक 13 दिन के लिए भारत के ग्यारहवें प्रधानमंत्री के रुप में कार्य किया
  • वर्ष 1996 से 1997 तक, अटल जी लोकसभा में विपक्ष के नेता थे।
  • 13 अक्टूबर 1999 से 13 मई 2004 तक  प्रधानमंत्री के रुप में कार्य किया

अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार (Atal bihari vajpayee Quotes in Hindi)

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